पाचन पथ के अस्तर पर घाव अल्सर हैं। अल्सर अधिकतर ड्यूडेनम (आंत का पहला भाग) में होता है। दूसरा सबसे आम भाग पेट है (आमाशय अल्सर)।
अल्सर के क्या कारण हैं?
- जीवाणु का एक प्रकार हेलिकोबैक्टर पाइलोरी कई अल्सरों का कारण है।
- अम्ल तथा पेट द्वारा बनाये गये अन्य रस पाचन पथ के अस्तर को जलाकर अल्सर होने में योगदान कर सकते हैं। यह तब होता है जब शरीर बहुत ज्यादा अम्ल बनाता है या पाचन पथ का अस्तर किसी वज़ह से क्षतिग्रस्त हो जाए।
- व्यक्ति में शारीरिक या भावनात्मक तनाव पहले से ही उपस्थित अल्सर को बढ़ा सकते हैं।
- अल्सर कुछ दवाओं के निरंतर प्रयोग, जैसे दर्द निवारक दवाओं के कारण भी हो सकता है।
अल्सर के संभावित लक्षण
- जब आप खाते या पीते हैं तो बेहतर महसूस करते है तथा फिर 1 या 2 घंटे बाद स्थिति बदतर (ड्यूडेनल अल्सर) हो जाती है
- जब आप खाते या पीते हैं तो अच्छा महसूस नहीं करते (पेट का अल्सर)
- पेट दर्द जो रात में होता है
- पेट में भारीपन, फूला हुआ, जलन या हल्का दर्द महसूस हो
- वमन
- अनपेक्षित रूप से वजन का घटना
प्रबंधन के लिए सरल नुस्खे
- धूम्रपान न करें
- प्रदाहनाशी दवाओं से बचें जब तक एक चिकित्सक द्वारा न दी जाए
- कैफीन तथा शराब से बचें
- मसालेदार भोजन से बचें यदि वे जलन पैदा करते हैं।
आपके अल्सर की बिगड़ती हालत के चेतावनी संकेत
- आपको रक्त वमन हो
- आप घंटों या दिनों पहले खाये भोजन का वमन करें ।
- आपको असामान्य रूप से कमजोरी या चक्कर महसूस हो।
- आपके मल में रक्त हो (रक्त आपके मल को काला या राल की तरह बना सकता हैं।)
- आपको हमेशा मतली हो या लगातार वमन हो
- आपको अचानक तेज दर्द हो
- आपका वजन लगातार घट रहा हो
- दवाई लेने पर भी आपका दर्द दूर नहीं होता हो।
- आपका दर्द पीठ तक पहुंचे।
अल्सर से बचाव के घरेलू उपाय (Home remedies for ulcer):
1. पोहा (Bitten rice)- पोहा अल्सर के उपचार में बेहद फायदेमंद है। पोहा और सौंफ को बराबर मात्रा में मिलाकर पाउडर बना लें। इस पाउडर की 20 ग्राम मात्रा को 2 लीटर पानी में घोलकर रख दीजिए। दोपहर से रात तक इस पानी को पूरा खत्म करें। अल्सर से राहत मिलेगी।
2. पत्ता गोभी और गाजर (Cabbage and carrot)- पत्ता गोभी में लेक्टिक एसिड होता है जिससे एमीनो एसिड बनता है जो पेट में रक्त का प्रवाह बढ़ाता है। इसके साथ ही पत्ता गोभी में विटामिन सी (vitamin c) भी उच्च मात्रा में होता है। पत्ता गोभी और गाजर को बराबर मात्रा में मिलाकर जूस तैयार करें और सुबह शाम एक-एक कप पीएं।
3. नारियल (Coconut)- नारियल में एंटीबैक्टीरियल गुण पाये जाते हैं, जो कि अल्सर पैदा करने वाले बैक्टीरिया को मार देते हैं। नारियल के दूध और पानी में भी एंटी- अल्सर गुण पाये जाते हैं। अल्सर के उपचार के लिए रोजाना नारियल पानी पीएं। नारियल के तेल का सेवन भी अल्सर से बचाता है।
4. गाय का दूध (Cow milk)- हल्दी में एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं, गाय के दूध में हल्दी मिलाकर पीने से भी अल्सर रोगियों को लाभ मिलता है।
5. बादाम (Almond)- अल्सर रोगियों को बादाम पीसकर, खाने से लाभ होता है। बादाम को पीसकर उसका दूध जैसा बनाकर पीएं।
6. सहजन (Drum stick)- सहजन की फली भी स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद फायदेमंद है। इसमें एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं जो रोगों से लड़ने में सहायक होते हैं। सहजन की फली को पीसकर, दही के साथ मिलाकर खाने से अल्सर रोग में आराम मिलता है।
7. शहद (Honey)- कच्चा शहद भी पेट के अल्सर में बेहद लाभकारी है। शहद में ग्लूकोज पैरॉक्साइड (glucose peroxide) पाया जाता है, जो पेट में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म कर देता है। इसके साथ ही शहद के सेवन से पेट की जलन से भी आराम मिलता है।
8. केला (Banana)- केला में एंटीबैक्टीरियल तत्व पाए जाते हैं। केला खाने से एसिडिटी से भी राहत मिलती है। कच्चा और पका दोनों ही तरह का केला खाने से अल्सर रोगियों को बेहद आराम मिलता है। कच्चे केले की सब्जी बनाकर उसमें एक चुटकी हींग मिलाकर खाएं।
9. लहसुन (Garlic)- लहसुन पेट के अल्सर में बेहद लाभकारी है। उपचार के लिए दो से तीन लहसुन की कलियों को कुचलकर, पानी के साथ खाएं।
10. बेलफल (Wood apple)- पेट के अल्सर में बेलफल और उसकी पत्तियों का सेवन भी बेहद लाभदायक है। पत्तियों में मौजूद टेनिन्स पेट को, किसी भी तरह के नुकसान से बचाता है। बेलफल का रस भी पेट की जलन और दर्द को दूर कर, अल्सर से बचाता है।

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