सूक्ष्म श्वास नलियों में कोई रोग उत्पन्न हो जाने के कारण जब किसी व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी होने लगती है तब यह स्थिति दमा रोग कहलाती है, इस रोग में व्यक्ति को खांसी की समस्या भी होती है।



दमा क्या है
दमा एक गंभीर बीमारी है, जो आपकी श्वास नलिकाओं को प्रभावित करती है। श्वास नलिकाएं आपके फेफड़े से हवा को अंदर-बाहर करती हैं। यदि आपको दमा है, तो इन नलिकाओं की भीतरी दीवार में सूजन होता है। यह सूजन नलिकाओं को बेहद संवेदनशील बना देता है और किसी भी बेचैन करनेवाली चीज के स्पर्श से यह तीखी प्रतिक्रिया करता है। जब नलिकाएं प्रतिक्रिया करती हैं, तो उनमें संकुचन होता है और उस स्थिति में आपके फेफड़े में हवा की कम मात्रा जाती है। इससे खांसी, नाक बजना, छाती का कड़ा होना, रात और सुबह में सांस लेने में तकलीफ आदि जैसे लक्षण पैदा होते हैं। दमा को ठीक नहीं किया जा सकता, लेकिन इस पर नियंत्रण पाया जा सकता है, ताकि दमे से पीड़ित व्यक्ति सामान्य जीवन व्यतीत कर सके। दमे का दौरा पड़ने से श्वास नलिकाएं पूरी तरह बंद हो सकती हैं, जिससे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को आक्सीजन की आपूर्ति बंद हो सकती है। यह चिकित्सकीय रूप से आपात स्थिति है। दमे के दौरे से मरीज की मौत भी हो सकती है।

दमा के लक्षण


दमा रोग होने के कारण (Causes of Asthma in Hindi)
अस्थमा कई कारणों से होता है कई बार यह जेनेटिक तो कई बार आनुवांशिक भी हो सकता है। कई अन्य कारण निम्न हैं: 
  • औषधियों का अधिक प्रयोग करने के कारण कफ़ सूख जाने से दमा हो जाता है।
  • खान-पान के गलत तरीके से यह रोग हो सकता है।
  • मानसिक तनाव, क्रोध तथा अधिक भय के कारण भी दमा होने का एक कारण है।
  • खून में किसी प्रकार से दोष उत्पन्न हो जाने के कारण भी दमा हो सकता है।
  • नशीले पदार्थों का अधिक सेवन करना भी इस रोग का कारण है।
  • खांसी, जुकाम तथा नजला रोग अधिक समय तक रहने से दमा हो सकता है।
  • भूख से अधिक भोजन खाने से दमा हो सकता है।
  • मिर्च-मसाले, तले-भुने खाद्य पदार्थों तथा गरिष्ठ भोजन करने से यह रोग हो सकता है।
  • फेफड़ों में कमजोरी, हृदय में कमजोरी, गुर्दों में कमजोरी, आंतों में कमजोरी, स्नायुमण्डल में कमजोरी तथा नाकड़ा रोग हो जाने के कारण दमा हो जाता है।
  • मनुष्य की श्वास नलिका में धूल तथा ठंड लग जाने के कारण भी दमा हो सकता है।
  • धूल के कण, खोपड़ी के खुरण्ड, कुछ पौधों के पुष्परज, अण्डे तथा ऐसे ही अन्य पदार्थों का भोजन में अधिक सेवन करने के कारण यह रोग हो सकता है।
  • मनुष्य के शरीर की पाचन नलियों में जलन उत्पन्न करने वाले पदार्थों का सेवन करने से भी दमा हो सकता है।
  • मल-मूत्र के वेग को बार-बार रोकने से यह रोग हो सकता है।
  • गर्द, धुआं, गंदगी, बदबू, गंदे बिस्तर, पुरानी किताबें और कपड़ों की झाड़, खेतों की झाड़, सख्त सर्दी, बरसात, जुकाम, फ्लू, आदि सूक्ष्म कणों का सांस द्वारा फेफड़ों में जाने से दमा हो सकता है।
  • वातावरण में प्रदूषण से होने वाली एलर्जी
  • इसके अलावा कई लोगों में कुछ निश्चित दवाओं (एस्पिरीन और बेटा- ब्लॉकर्स) के सेवन से भी दमा के रिस्क फैक्टर्स बढ़ सकते हैं।
  • अत्यधिक भावनात्मक अभिव्यक्तियां (जैसे चीखने-चिल्लाने या फिर जोरदार तरीके से हंसना भी) भी कुछ लोगों में दमा की समस्या को बढ़ाकर दौरे की स्थिति उत्पन्न कर सकती हैं।
  • अस्थमा या एलर्जी का पारिवारिक इतिहास (आनिवांशिक दमा)
  • जन्म के समय कम वजन और समय से पहले बच्चों का जन्म, जन्म के पहले और / या जन्म के बाद तंबाकू के धुएं के संपर्क
  • भीड़, वायुप्रदूषण, धूल (घर या बाहर की) या पेपर की डस्ट, रसोई का धुआं, नमी, सीलन, मौसम परिवर्तन, सर्दी-जुकाम, धूम्रपान, फास्टफूड्स, तनाव व चिंता, पालतू जानवर के संपर्क में रहना और पेड़-पौधों और फूलों के परागकणों (पौधे के फूलों में पाये जाने वाले सूक्ष्म कणों को परागकण कहते हैं) आदि को शामिल किया जाता है।


दमा उभरने के कुछ लक्षण हैं-
  • जानवरों से (जानवरों की त्वचा, बाल, पंख या रोयें से)
  • दीमक (घरों में पाये जाते हैं)
  • तिलचट्टे
  • पेड़ और घास के पराग कण
  • धूलकण
  • सिगरेट का धुआं
  • वायु प्रदूषण
  • ठंडी हवा या मौसमी बदलाव
  • पेंट या रसोई की तीखी गंध
  • सुगंधित उत्पाद
  • मजबूत भावनात्मक मनोभाव (जैसे रोना या लगातार हंसना) और तनाव
  • एस्पिरीन और अन्य दवाएं
  • खाद्य पदार्थों में सल्फाइट (सूखे फल) या पेय (शराब)
  • गैस्ट्रो इसोफीगल रीफ्लक्स
  • विशेष रसायन या धूल जैसे अवयव
  • संक्रमण
  • पारिवारिक इतिहास
  • तंबाकू के धुएं से भरे माहौल में रहनेवाले शिशुओं को दमा होने का खतरा होता है। यदि गर्भावस्था के दौरान कोई महिला तंबाकू के धुएं के बीच रहती है, तो उसके बच्चे को दमा होने का खतरा होता है।
  • मोटापे से भी दमा हो सकता है। अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं।



अस्थमा के घरेलू उपचार:-

  • लहसुन दमा के इलाज में काफी कारगर साबित होता है। 30 मिली दूध में लहसुन की पांच कलियां उबालें और इस मिश्रण का हर रोज सेवन करने से दमे में शुरुआती अवस्था में काफी फायदा मिलता है।
  • अदरक की गरम चाय में लहसुन की दो पिसी कलियां मिलाकर पीने से भी अस्थमा नियंत्रित रहता है। सबेरे और शाम इस चाय का सेवन करने से मरीज को फायदा होता है।
  • अदरक का एक चम्मच ताजा रस, एक कप मैथी के काढ़े और स्वादानुसार शहद इस मिश्रण में मिलाएं। दमे के मरीजों के लिए यह मिश्रण लाजवाब साबित होता है।
  • दमा रोगी पानी में अजवाइन मिलाकर इसे उबालें और पानी से उठती भाप लें, यह घरेलू उपाय काफी फायदेमंद होता है।
  • 4-5 लौंग लें और 125 मिली पानी में 5 मिनट तक उबालें। इस मिश्रण को छानकर इसमें एक चम्मच शुद्ध शहद मिलाएँ और गरम-गरम पी लें। हर रोज दो से तीन बार यह काढ़ा बनाकर पीने से मरीज को निश्चित रूप से लाभ होता है।
  • 180 मिमी पानी में मुट्ठीभर सहजन की पत्तियां मिलाकर करीब 5 मिनट तक उबालें। मिश्रण को ठंडा होने दें, उसमें चुटकीभर नमक, कालीमिर्च और नीबू रस भी मिलाया जा सकता है। इस सूप का नियमित रूप से इस्तेमाल दमा उपचार में कारगर माना गया है।
  • मैथी का काढ़ा तैयार करने के लिए एक चम्मच मैथीदाना और एक कप पानी उबालें। हर रोज सबेरे-शाम इस मिश्रण का सेवन करने से निश्चित लाभ मिलता है।
  • एक पका केला छिलका लेकर चाकू से लम्बाई में चीरा लगाकर उसमें एक छोटा चम्मच दो ग्राम कपड़ा छान की हुई काली मिर्च भर दें। फिर उसे बगैर छीले ही, केले के वृक्ष के पत्ते में अच्छी तरह लपेट कर डोरे से बांध कर 2-3 घंटे रख दें। बाद में केले के पत्ते सहित उसे आग में इस प्रकार भूने की उपर का पत्ता जले। ठंडा होने पर केले का छिलका निकालकर केला खा लें।



जब थायरॉइड ग्लैंड जरूरत के मुताबिक थायरॉइड हार्मोन स्त्रावित नहीं करती तो यह रोग हायपोथायरॉइड कहलाता है। इसे मेडिकल के क्षेत्र में हायपोथायरॉइडिज्म भी कहा जाता है।
वटुग्रंथि (थायराइड) एक छोटी सी ग्रंथि होती है जो तितली के आकार की निचले गर्दन के बीच में होती है। इसका मूल काम होता है कि शरीर के उपापचय (मेटाबोलिज्म) (कोशिकाओं की दर जिससे वह जीवित रहने के लिए आवश्यक कार्य कर सकता हो) को नियंत्रित करे। उपापचय (मेटाबोलिज़्म) को नियंत्रित करने के लिए अवटुग्रंथि (थायराइड) हार्मोन बनाता है जो शरीर के कोशिकाओं को यह बताता है कि कितनी उर्जा का उपयोग किया जाना है। यदि अवटुग्रंथि (थायराइड) सही तरीके से काम करे तो संतोषजनक दर पर शरीर के उपापचय (मेटाबोलिज़म) के कार्य के लिए आवश्यक हार्मोन की सही मात्रा बनी रहेगी। जैसे-जैसे हार्मोन का उपयोग होता रहता है, अवटुग्रंथि (थायराइड) उसकी प्रतिस्थापना करता रहता है। अवटुग्रंथि, रक्त की धारा में हार्मोन की मात्रा को पिट्यूटरी ग्रंथि को संचालित करके नियंत्रित करता है। जब मस्तिष्क के नीचे खोपड़ी के बीच में स्थित पिट्यूटरी ग्रंथि को यह पता चलता है कि अवटुग्रंथि हार्मोन की कमी हुई है या उसकी मात्रा अधिक है तो वह अपने हार्मोन (टीएसएच) को समायोजित करता है और अवटुग्रंथि को बताता है कि क्या करना है।


अवटुग्रंथि बीमारी के क्या कारण है?
हाइपोथाइराडिज़्म के कारण निम्नलिखित हैं-
  • थाइरोडिटिस में अवटुग्रंथि सूज जाती है। इससे हार्मोन आवश्यकता से कम बनता है।
  • हशिमोटो का थाइरोडिटिस असंक्राम्य (इम्यून) प्रणाली की बीमारी है जिसमें दर्द नहीं होता। यह वंशानुगत बीमारी है।
  • पोस्टपरटम थाइरोडिटिस प्रसव के बाद 5 से 9 प्रतिशत महिलाओं को होती है।
  • आयोडीन की कमी एक ऐसी समस्या है जो विश्व में लगभग एक करोड़ लोगों को है। अवटुग्रंथि आयोडिन का उपयोग हार्मोन बनाने के लिए करता है।
  • अकार्य अवटुग्रंथि 4000 में एक नवजात शिशु को होता है। यदि इस समस्या का समाधान न किया गया हो तो बच्चा शारीरिक और मानसिक रूप से पिछड़ सकता है।


हाइपरथाइराडिज़्म के कारण निम्नलिखित हैं-
  • ग्रेव बीमारी में पूरा अवटुग्रंथि अति सक्रिय हो जाता है और अधिक हार्मोन बनाने लगता है।
  • नोड्यूल्स अवटुग्रंथि में भी अति सक्रिय हो जाता है।
  • थाइरोडिटिस एक ऐसी बीमारी है जिसमें दर्द हो भी सकता है या नहीं भी हो सकता है। ऐसा भी हो सकता है कि अवटुग्रंथि(थाइराड) में ही रखे गए हार्मोन निर्मुक्त हो जाए जिससे कुछ सप्ताह या महीनों के लिए हाइपरथारोडिज़्म की बीमारी हो जाए। दर्दरहित थाईरोडिटिस अक्सर प्रसव के बाद महिला में पाया जाता है।
  • अत्यधिक आयोडिन कई औषधियों में पाया जाता है जिससे किसी-किसी में अवटुग्रंथि या तो बहुत अधिक या फिर बहुत कम हार्मोन बनाने लगता है।



हाइपोथायरोडिज़्म और हाइपरथायरोडिज़्म के लक्षण क्या-क्या है?
हाइपोथायरोडिज़्म के निम्नलिखित लक्षण है:
  • थकावट
  • अक्सर और अधिक मासिक-धर्म
  • स्मरणशक्ति में कमी
  • वजन बढ़ना
  • सूखी और रूखी त्वचा और बाल
  • कर्कश वाणी
  • सर्दी को सह नहीं पाना

हाइपरथायरोडिज़्म के निम्नलिखित लक्षण है:
  • चिड़-चिड़ापन/अधैर्यता
  • मांस-पेशियों में कमजोरी/कंपकपीं
  • मासिक-धर्म अक्सर न होना या बहुत कम होना
  • वजन घटना
  • नींद ठीक से न आना
  • अवटुग्रंथि का बढ़ जाना
  • आंख की समस्या या आंख में जलन
  • गर्मी के प्रति संवेदनशीलता

यदि अवटुग्रंथि की बीमारी जल्दी पकड़ में आ जाती है तो लक्षण दिखाई देने से पहले उपचार से यह ठीक हो सकता है। अवटुग्रंथि जीवन भर रहता है। ध्यानपूर्वक इसके प्रबंधन से अवटुग्रंथि (थाइराड) से पीड़ित व्यक्ति अपना जीवन स्वस्थ और सामान्य रूप से जी सकते हैं।


हायपोथायरॉइड से बचाव के लिए घरेलू नुस्ख़े (Home Remedies for Hyopothyroid)

नारियल तेल (Coconut Oil)
नारियल तेल में जरूरी फैटी एसिड होते हैं, जो थायरॉइड को नियंत्रित करते हैं। उपचार के लिए रोजाना बनाए जाने वाले खाने में नारियल के तेल का इस्तोल करें। संभव हो तो रोजाना एक गिलास दूध में नारियल तेल को मिलाकर पिएं।


सेब का सिरका (Apple Cider Vinegar)
सेब का सिरका भी थायरॉइड की समस्या से निजात दिला सकता है। इसके डिटॉक्सीफिकेशन  (Detoxification) के गुण अल्कालाइन (Alkaline) के संतुलन को बनाकर वजन को घटाते हैं और हार्मोन्स को स्तर ठीक करते हैं। इतना ही नही, सेब का सिरका कोलेस्ट्रॉल को भी नियंत्रित करता है। एक गिलास गुनगुने पानी में दो चम्मच सेब का सिरका मिलाकर पीएं। इस पेय में आवश्यकता अनुसार शहद मिला सकते हैं।


विटामिन डी (Vitamin D)
विटामिन डी थायरॉइड की समस्या से निपटने के लिए बहुत जरूरी है। इसके लिए रोज कम से कम 15 मिनट धूप में जरूर बैठें। इससे शरीर में कैल्शियम की मात्रा भी बढ़ती है।


अदरक (Ginger)
अदरक, जिंक, पोटेशियम, और मैग्नीशियम का अच्छा स्त्रोत है। इसके लिए अदरक की हर्बल चाय को दिनचर्या में शामिल करें। चाय बनाने के लिए उबलते पानी में कुछ टुकड़े अदरक के डालें। अच्छी तरह से उबल जाए तो कुछ देर ठंडा करें। गुनगुना रह जाए तब इसमें शहद मिलाएं और अदरक की इस चाय को पीएं। इस चाय को दिन में दो से तीन बार पिया जा सकता है।


मछली का तेल (Fish Oil)
मछली का तेल थायरॉइड हार्मोन के स्तर को बढ़ाता है। साथ ही, यह स्वस्थ थायरॉइड फंक्शन को भी बनाए रखता है। मछली के तेल में ओमेगा-3 फैटी एसिड काफी अधिक होता है जो कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता हैं। डॉक्टर की सलाह से मछली के तेल के सप्लीमेंट लिए जा सकते हैं।


आयोडीन की मात्रा बढाएं (Increase Iodine)
आयोडीन की ऑर्गेनिक इनटेक भी हायपोथायरॉइडिज्म में राहत का काम करती है। आयोडीन के ऑर्गेनिक स्रोतों में प्याज, ओट, टमाटर, लहसुन, बंदगोभी, अनानास और स्ट्रॉबेरी, आदि शामिल हैं। इन खाद्य पदार्थों को रोज के भोजन में शामिल करें।


काले अखरोट (Black Wallnut)
काले अखरोट मिनरल, जैसे कि आयोडीन और मैगनीज के उच्च स्रोत होते हैं। यह मिनरल थाइरॉइड ग्लैंड को समुचित रूप से काम करने के लिए प्रेरित करते हैं। काले अखरोट को भी रोज खाया जा सकता है।


तनाव से दूर रहें (Avoid Stress)
यदि आप थायरॉइड संबंधी किसी भी परेशानी से ग्रसित हैं तो तनाव बिल्कुल न लें। ऐसा कोई भी कार्य न करें, जो आपको इरीटेट करता हो और आपके तनाव को बढ़ाता हो क्योंकि तनाव से आपकी स्थिति और भी बिगड़ सकती है।


हाई कैलोरी फूड से बचें  (Avoid High Calorie Food)
बिस्कुट, मिठाईयां, केक और इसी प्रकार के अन्य खाने की चीजें जो हाई कैलोरीयुक्त होती हैं, उन्हें एकदम अवॉइड करें। इसके साथ ही खाने से सफेद चावल, मैदा, तला हुआ खाना आदि से भी पहरेज करें। इतना ही नहीं चाय और कॉफी की मात्रा भी घटाएं, जिससे हायपोथायरॉइडिज्म में आराम हो।


घुटनों का दर्द के लक्षण


बढ़ती उम्र और मोटापे के कारण अकसर घुटनों के दर्द से दो-चार होना पड़ता है। घुटनों के दर्द के कुछ अन्य कारण (Causes of Knee Pain in Hindi) निम्न हैं: 
  • अर्थराइटिस- रीयूमेटाइड, आस्टियोअर्थराइटिस और गाउट सहित अथवा संबंधित ऊतक विकार
  • बरसाइटिस- घुटने पर बार-बार दबाव से सूजन (जैसे लंबे समय के लिए घुटने के बल बैठना, घुटने का अधिक उपयोग करना अथवा घुटने में चोट)
  • टेन्टीनाइटिस- आपके घुटने में सामने की ओर दर्द जो सीढ़ियों अथवा चढ़ाव पर चढ़ते और उतरते समय बढ़ जाता है। यह धावकों, स्कॉयर और साइकिल चलाने वालों को होता है।
  • बेकर्स सिस्ट- घुटने के पीछे पानी से भरा सूजन जिसके साथ अर्थराइटिस जैसे अन्य कारणों से सूजन भी हो सकती है। यदि सिस्ट फट जाती है तो आपके घुटने के पीछे का दर्द नीचे आपकी पिंडली तक जा सकता है।
  • घिसा हुआ कारटिलेज घुटने के जोड़ के अंदर की ओर अथवा बाहर की ओर दर्द पैदा कर सकता है। 
  • घिसा हुआ लिगामेंट (ए सी एल टियर)- घुटने में दर्द और अस्थायित्व उत्पन्न कर सकता है।
  • नीकैप (Knee Cap) का विस्थापन। 
  • झटका लगना अथवा मोच- अचानक अथवा अप्राकृतिक ढंग से मुड़ जाने के कारण लिगामेंट में मामूली चोट। 
  • जोड़ में संक्रमण (इंफेक्शन)। 
  • घुटने की चोट- आपके घुटने में रक्त स्राव हो सकता है जिससे दर्द अधिक होता है |
  • श्रोणि विकार (Pelvic Disorder)- यह दर्द उत्पन्न कर सकता है जो घुटने में महसूस होता है। उदाहरण के लिए इलियोटिबियल बैंड सिंड्रोम एक ऐसी चोट है जो आपके श्रोणि से आपके घुटने के बाहर तक जाती है।
  • मोटापा, जिसके कारण घुटनों पर अधिक बोझ पड़ता है, जिससे घुटने का कार्टिलेज घिस जाता है। हड्डी के सिरों पर पड़ने वाला अधिक दबाव इस दर्द को और अधिक बढ़ा देता है।

घर में देखभाल
  • घुटने के दर्द के कई कारण है, विशेषकर जो अति उपयोग अथवा शारीरिक क्रिया से संबंधित है। यदि आप स्वयं इसकी देखभाल करें तो इसके अच्छे परिणाम निकलते हैं।
  • आराम करें और ऐसे कार्यों से बचे जो दर्द बढ़ा देते हैं, विशेष रूप से वजन उठाने वाले कार्य
  • बर्फ लगाएं। पहले इसे प्रत्येक घंटे 15 मिनट लगाएं। पहले दिन के बाद प्रतिदिन कम से कम 4 बार लगाएं।
  • किसी भी प्रकार की सूजन को कम करने के लिए अपने घुटने को यथा संभव ऊपर उठा कर रखें।
  • कोई ऐसा बैंडेज अथवा एलास्टिक स्लीव पहनकर घुटने को धीरे धीरे दबाएं। ये दोनों वस्तुएं लगभग सभी दवाइयों की दुकानों पर मिलती है। यह सूजन को कम कर सकता है और सहारा भी देता है।
  • अपने घुटनों के नीचे अथवा बीच में एक तकिया रखकर सोएं।



घुटनों के दर्द के उपाय (Treatment and Remedies of Knee Pain in Hindi)
  • अपना वजन नियंत्रित रखें। 
  • स्विमिंग करना सबसे फायदेमंद है। 
  • दौड़ने से ज्यादा चलना अच्छा रहता है। 
  • जांघ की मांसपेशियों से संबंधित व्यायाम करें।
  • फल व सब्जियों का भरपूर सेवन करें। इनमें एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होते हैं। 
  • घुटनों को मोड़कर नहीं बैठना चाहिए।  पेट को साफ रखें तथा कब्ज न होने दें। 
  • घुटनों के नीचे अथवा बीच में एक तकिया रखकर सोएं।
  • दिन में कम से कम 2 बार बर्फ लगाएं।
  • डॉक्टर से समय-समय पर जांच कराते रहें।


घुटने के दर्द के लिए घरेलू उपचार 
1. ठंडा सेक (Cold fomentation)
घुटनों के दर्द से राहत के लिए ठंडा सेक दिया जा सकता है। यह सबसे आसान और प्रभावी तरीकों में से एक है। घुटनों को ठंडा सेक देने से यह रक्त वाहिकाओं को कसता है जिससे रक्त प्रवाह कम होता है और सूजन भी घटती है। 
कैसे करें-
एक पतली तौलिया में बर्फ के टुकड़े लपेट लें। 10 से 20 मिनट के लिए दर्द प्रभावित घुटने के हिस्से को सेकें। आपका दर्द धीरे धीरे दूर हो जाएगा। इस उपाय को रोजाना दो या तीन बार कर सकते हैं।


2. सेब का सिरका (Apple cider vinegar)
सेब का सिरका भी घुटने के दर्द को कम करने में सहायक है। ये घुटने के जोड़ के भीतर खनिज इकठ्ठा करता है और हानिकारक विषाक्त पदार्थों को नष्ट करता है।
कैसे करें- 
दो कप फ़िल्टर्ड पानी में दो चम्मच सेब का सिरका मिलाएं। दिनभर में यह घोल पीएं। पूरी तरह ठीक होने तक रोजाना इस टॉनिक का सेवन करें।
बाल्टी में गर्म पानी डालकर उसमें दो कप सेब का सिरका मिलाकर 30 मिनट के लिए पानी में प्रभावित घुटने भिगाकर बैठ जाएं। इससे घुटनों के दर्द में काफी राहत मिलेगी।
एक चम्मच सेब का सिरका और जैतून के तेल को बराबर भागों में मिलाकर घुटनों की मालिश करें, फायदा होगा।


3. लाल मिर्च (Red Chilli)
लाल मिर्च के इस्तेमाल से घुटनों के दर्द में भी राहत मिलती है, इसमें मौजूद केपसाइसिन दर्द निवारक की तरह काम करता है।
कैसे करें- 
एक से डेढ़ कप तेल में दो बड़े चम्मच लाल मिर्च पाउडर डालकर एक पेस्ट तैयार करें। कम से कम एक सप्ताह तक हर दिन दो बार यह पेस्ट घुटनों पर लगाएं। घुटनों के दर्द से राहत मिलेगी।
एक कप सेब के सिरके में एक चौथाई या आधा चम्मच लाल मिर्च पाउडर डालकर मित्रण तैयार करें। इस मित्रण को घुटनों पर लगाने से दर्द और सूजन कम हो जाती है। जब तक घुटनों दर्द से राहत न हो तब तक हर दिन इस पेस्ट को 20 मिनट के लिए घुटनों पर लगा सकते हैं। 



4. अदरक (Ginger)
घुटने का दर्द मांसपेशियों में तनाव की वजह से हो या गठिया के कारण, अदरक दोनों ही स्थिति में बेहद लाभप्रद है। इसमें एंटी़फ्लेमेबल गुण होते हैं जो घुटने की सूजन और दर्द को कम कर देते हैं।
कैसे करें-
एक कप पानी में थोड़ा सा अदरक का टुकड़ा लेकर 10 मिनट उबाल लें। इसके बाद इसको ठंडा करके इसमें थोड़ा सा नींबू का रस और शहद मिलाएं। इस घोल को रोज पीएं। आप चाहें तो अदरक के तेल से घुटनों की मालिश भी कर सकते हैं। 



5. हल्दी (Haldi)
हल्दी घुटने के दर्द को दूर करने के लिए एक प्रभावी और प्राकृतिक उपचार है। हल्दी में मौजूद कुरक्यूमिन एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करता है और दर्द कम करने में मदद करता है।
कैसे करें-
एक कप पानी में अदरक और हल्दी को थोड़ा थोड़ा मिलाकर 10 मिनट के लिए इसे उबाल लें। इसके बाद इसको गुनगुना होने के बाद शहद मिलाएं। दिन में दो बार इसे पीएं।
एक गिलास दूध में हल्दी डालकर उबालें और उसमें शहद मिलाकर पीएं। इससे भी घुटनों का दर्द ठीक होता है।
नोट: 
* हल्दी रक्त को पतला करती है, ऐसे में खून पतला (Blood Thinning) करने की दवा लेने वालों के लिए यह ठीक नहीं।
* शहद को बहुत गरम पानी या दूध में नहीं मिलाना चाहिए।



6. नींबू (Lemon)
नींबू भी गठिया की वजह से घुटने के दर्द के लिए एक घरेलू लाभकारी उपाय है। नींबू में पाया जाने वाला साइट्रिक एसिड (citric acid) गठिया में यूरिक एसिड क्रिस्टल को घुलाता है।
कैसे करें-
एक नींबू छोटे-छोटे टुकड़ों में काटें। इन टुकड़ों को सूती कपड़े में डालकर गर्म तिल के तेल में डुबाएं। इसके बाद पांच से 10 मिनट के लिए प्रभावित घुटने पर कपड़ा रखें। एक दिन में दो बार ऐसा करने से दर्द पूरी तरह चला जाता है।
एक गिलास पानी में नींबू निचाड़कर पीने से भी लाभ होता है।

हाई ब्लड प्रेशर या उच्च रक्तचाप की समस्या आजकल बेहद आम होती जा रही है। उच्च रक्तचाप के दौरान मरीज के शरीर में रक्त का प्रवाह बेहद तेज हो जाता है। इस स्थिति में आपके हृदय को अधिक काम करना पड़ता है। आइये जानें इससे जुड़ी अन्य बातें: 
उच्च रक्तचाप (About High Blood Pressure in Hindi)
रक्त द्वारा धमनियों पर पड़ने वाले दबाव को ब्लड प्रेशर कहते हैं। सामान्यतः हमारी धमनियों में बहने वाले रक्त का एक निश्चित दबाव होता है, जब यह दबाव अधिक हो जाता है तो धमनियों पर दबाव बढ़ जाता है और इस स्थति को उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure) से जाना जाता है| लगातार उच्च रक्तचाप शरीर को कई तरीके से हानि पहुंचा सकता है। यहाँ तक की हार्ट फेल भी हो सकता है।

सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर (Systolic Blood Pressure)
निलयी प्रकुंचन (Ventricular systole) के दौरान रक्त को महाधमनी में धकेलने लिए बायें निलय (Ventricle) के संकुचित होने पर बनने वाला अधिकतम रक्त-चाप सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर कहलाता है।

औसत ब्लड प्रेशर (Blood Pressure Range in Normal Condition)
सामान्य स्वस्थ वयस्क का विश्रामावस्था में सिस्टोलिक प्रेशर का परिसर 100 Hg. से 140 मिमी. पारे के बीच रहता है तथा औसतन 120 मिमी पारे के बीच रहता है।

उच्च रक्तचाप के कारण (Reason for High Blood Pressure)
  • धूम्रपान
  • मोटापा
  • निष्क्रियता
  • नमक का ज्यादा सेवन
  • शराब पीना
  • तनाव
  • बढ़ती उम्र
  • आनुवंशिकता
  • पारिवारिक इतिहास
  • पुरानी किडनी की बीमारी
  • थाइरोइड डिसऑर्डर 

उच्च रक्तचाप के लक्षण



सामान्य उपचार


रक्तचाप (Blood Pressure) बढ़ने पर किस तरह अपना ध्यान रखना इसकी जानकारी होना बेहद जरूरी है। साथ ही समय-समय पर डॉक्टरी जांच इस बीमारी से बचाने में बहुत कारगर होती है। उच्च रक्तचाप से बचने के कुछ प्रमुख उपाय निम्न हैं: 
उच्च रक्तचाप से कैसे बचें (Treatment of High Blood Pressure in Hindi)
  • प्रतिदिन एक घंटा हल्का या तेज किसी प्रकार का व्यायाम जरूर करें।
  • खाने में हाई फाईबर वाले चीजें लेनी चाहिए। 
  • खुद को एक्टिव रखने का अधिक से अधिक प्रयास करना चाहिए। 
  • समय-समय पर डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। 


उच्च रक्तचाप के लिए घरेलू नुस्ख़े (Home Remedies for High Blood Pressure)
लहसुन (Garlic)
लहसुन को खाली पेट सुबह कच्चा ही खाएं। लहसुन में रक्त को पतला करने के गुण होते हैं जो कि रक्त का थक्का जमने से भी रोकता है। चिकित्सक से परामर्श लेकर लहसुन कर प्रयोग शुरू कर सकते हैं।


शहजन की फली (Drum Sticks)
शहजन में प्रोटीन, विटामिन और अन्य पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो कि शारीरिक स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहद जरूरी हैं। शहजन का उपयोग करने का आसान तरीका है कि इसकी फलियों को दाल के साथ बनाकर खाया जाए। इससे भी उच्च रक्तचाप नॉर्मल होता है।


आंवला (Indian Gooseberry)
आंवला में विटामिन सी की उच्च मात्रा होती है जो कि शरीर से कोलेस्ट्रॉल (cholesterol) की मात्रा को कम करती है। इससे दिल स्वस्थ रहता है और उच्च रक्त चाप नियंत्रित।


मूली (Radish)
रसोईघर में प्रयोग होने वाली आम सब्जी है मूली, लेकिन इसमें उच्च रक्त्चाप को नियंत्रित करने के गुण होते हैं। मूली को सलाद के रूप में कच्चा या दही के साथ मिलाकर खाया जा सकता है।


तिल (Sesame)
तिल डायस्टोलिक और सिस्टोलिक (Diastolic and Systolic) , दोनों तरह के रक्तचाप को नियंत्रित करता है। तिल के तेल में सिसमिन (Sesamin) और सिसमिनॉल (Sesaminol) दोनों होते हैं जो कि शरीर के तनाव को कम करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
तिल का खाने में प्रयोग करने से उच्च रक्तचाप को नियंत्रित किया जा सकता है। तिल के लड्डू या तिल का पाउडर सलाद या दाल सब्जी में ऊपर से छिड़ककर खाने से लाभ होता है।


अलसी के बीज (Flex Seed)
अलसी के बीज ओमेगा-3 फैटी एसिड में से एक है जिससे इसमें अल्फा लिनोलेनिक एसिड (Alfa Linolenic Acid) नामक यौगिक की उच्च मात्रा होती है। यह उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने के साथ ही केलॉस्ट्रॉल की मात्रा भी घटाता है जिससे हृदय भी स्वस्थ बनता है।


दिनचर्या में करें परिवर्तन (Changes in Daily Life Routine)
  • नमक कम खाएं
  • नियमित व्यायाम करें
  • उच्च वसा वाला खाना न खाएं
  • मांस न खाएं
  • ताजे फल और सब्जियों को भोजन में शामिल करें
  • तनाव से दूर रहें



मोटापा के कारण
  • मोटापा और शरीर का वजन बढ़ना ऊर्जा के सेवन और ऊर्जा के उपयोग के बीच असंतुलन के कारण होता है।
  • अधिक चर्बीयुक्त आहार का सेवन करना भी मोटापा का कारण है।
  • कम व्यायाम करना और स्थिर जीवन-यापन मोटापे का प्रमुख कारण है।
  • असंतुलित व्यवहार औऱ मानसिक तनाव की वजह से लोग ज्यादा भोजन करने लगते हैं, जो मोटापा का कारण बनता है।
  • शारीरिक क्रियाओं के सही ढंग से नहीं होने पर भी शरीर में चर्बी जमा होने लगती है।
  • बाल्यावस्था और युवावस्था के समय का मोटापा व्यस्क होने पर भी रह सकता है।


शरीर का उचित वजन
एक युवा व्यक्ति के शरीर का अपेक्षित वजन उसकी लंबाई के अनुसार होना चाहिए, जिससे कि उसका शारीरिक गठन अनुकूल लगे। शरीर के वजन को मापने के लिए सबसे साधारण उपाय है बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआइ) और यह शरीर के व्यक्ति की लंबाई को दुगुना कर उसमें वजन किलोग्राम से भाग देकर निकाला जाता है।
बीएमआई
< 18.5 : अस्वस्थ
18.5-23 : साधारण
23.1-30 : ज्यादा वजन
> 30 : मोटापा
वजन कम करने के लिए लिये उपभोग की जानेवाली खाद्य पदार्थों में यह ध्यान रखना चाहिए कि उनमें प्रोटीन की मात्रा अधिक हो और चर्बी तथा कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम।


मोटापा कैसे घटायें
  • तला खाना कम खायें
  • ज्यादा से ज्यादा फल और सब्जी खायें।
  • रेशायुक्त खाद्य पदार्थ का सेवन अधिक से अधिक करें जैसे अनाज, चना और अंकुरित चना।
  • शरीर के वजन को संतुलित रखने के लिए रोजाना कसरत करें।
  • धीरे, परंतु लगातार वजन को कम करें।
  • ज्यादा उपवास से शारीरिक नुकसान हो सकता है।
  • शारीरिक क्षमता को संतुलित रखने के लिए विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए।
  • थोड़-थोड़े अंतराल पर थोड़ा-थोड़ा खाना खायें।
  • भोजन में चीनी, चर्बीयुक्त खाद्य पदार्थ और अल्कोहल कम लें।
  • कम चर्बी वाले दूध का सेवन करें।


मोटापा या वजन कम करने के घरेलू नुस्ख़े (Home Remedies for Obesity)

शहद और अदरक का रस (Honey and Ginger Juice)
शहद और अदरक को मिलाकर खाने से वजन तेजी से कम होता है। शहद में फ्रक्टोज की उच्च मात्रा होती है जहां अतिरिक्त वसा को जलाने का काम करती है वहीं अदरक भी शरीर की वसा को पिघलाने का काम करता है और प्राकृतिक भूख लगने की क्रिया को बनाए रखता है।
उपचार के लिए दो बडे़ चम्मच अदरक के रस में, तीन बड़े चम्मच शहद मिलाकर पिएं। इस मिश्रण को एक दिन में दो बार पिएं। ऐसा करने से एक माह में ही आपको वजन में फर्क दिखाई देगा।


शहद और दालचीनी (Honey and Cinnamon Powder)
यह एक ऐसा मिश्रण है जिसे करने पर मोटे से मोटा आदमी भी पतला हो सकता है, वो भी बिना डाइटिंग और व्यायाम के। उपचार के लिए एक गिलास पानी में दालचीनी का एक बड़ा चम्मच पाउडर डालकर तकरीबन पन्द्रह मिनट उबालें। जब यह गुनगुना रह जाए तब इसे छानकर अलग करें और इसमें एक बड़ी चम्मच शहद मिलाकर पिएं। यह मिश्रण सुबह खाली पेट और रात को सोने से पहले पिएं। एक महीने से पहले ही आप खुद को हल्का महसूस करने लगेंगे।



नींबू, शहद और काली मिर्च (Lemon, Honey and Black Pepper)
नींबू, शहद और काली मिर्च का मिश्रण वजन घटाने के लिए अपनाए जाने वाले सबसे आसान तरीकों में से एक है। नींबू में पेक्टिन फाइबर होता है जो शरीर में वसा को जमा होने से रोकता है और शरीर की पीएच वेल्यू को बनाए रखता है।
काली मिर्च में पिपराइन होता है जो कि नई वसा कोशिकाओं को जमने से रोकता है। उपचार के लिए एक गिलास गुनगुने पानी में एक छोटी चम्मच शहद, एक छोटी चम्मच काली मिर्च और चार बड़ी चम्मच नींबू का रस मिलाएं। हर रोज सुबह-सुबह इस तरह के पानी को पीने से जल्द ही वजन कम होने लगेगा।



बेर की पत्ती (Indian Plum Leaves)
बेर की पत्तियों में वसा को काटने की शक्ति होती है। उपचार के लिए बेर की पत्तियों को रातभर पानी में भिगाकर सुबह सुबह चबाकर खाएं। ऐसा करने से एक महीने में वजन कम होने लगेगा।


सेब का सिरका (Apple Cider Vinegar)
सेब का सिरका भी वजन घटाने में असरकारक है। नींबू की तरह सेब के सिरका में भी पेक्टिन फाइबर होता है जो कि पेट को लंबे समय तक भरा रखता है और वसा को जमने नहीं देता। उपचार के लिए एक बोतल पानी मे एक छोटी चम्मच सेब का सिरका और एक छोटी चम्मच नींबू का रस मिलाएं। इस पानी को रोजाना पिएं। कुछ ही समय में वजन कम होने लगेगा।



गरम पानी (Warm Water)
गरम पानी से वजन कम करना सबसे आसान तरीकों में से एक है। दिन की शुरूआत गुनगुने पानी से करें और जब खाना खाने के आधे घंटे बाद भी नींबू का रस मिलाकर गरम पानी पिएं। ऐसा करने से खुद ब खुद वजन कम होने लगेगा।

रात के खाने को कहें ना (Say no to late night dinner)
वजन कम करने का एक और आसान तरीका है कि रात को खाना न खाएं, खासकर यदि आपको देर रात को खाना खाने की आदत है तो। कोशिश करें कि रात का खाना 8 बजे तक खा लें, यदि ऐसा करना संभव नहीं है तो खाने की जगह सलाद और लिक्विड चीजें लें लेकिन ठोस आहार न लें। ऐसा करने से भी तेजी से वजन कम होता है।



पत्ता गोभी (Cabbage)
स्वस्थ्य तरीके से वजन कम करने का तरीका है बंदगोभी। पत्ता गोभी फाइबर से युक्त और कैलोरी में कम होती है। पत्ता गोभी में टार्टरिक एसिड (Tartaric Acid) होता है जो शरीर में मौजूद कार्बोहाइडड्रेट और शुगर को वसा में परिवर्तित नहीं होने देता। उपचार के लिए सलाद में जितना संभव हो पत्ता गोभी खाएं। पत्ता गोभी की बिना मसाले की सब्जी भी बनाकर खाना लाभदायक है।

जुकाम विषाणुओं (वायरस) द्वारा फैलाया जाने वाले संक्रमण है जो खासकर हमारे सांस प्रणाली के आगे वाले हिस्से को प्रभावित करता है। जुकाम शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता का परिचायक है।

कब होता है जुकाम (Common Cold Causes in Hindi)
हमारे नाक और गले की भीतरी दीवार बलगम (Mucus--मयूकस) का स्राव करती है। बलगम एक चिपचिपा पदार्थ होता है जिस में धूल, पराग कण, जीवाणु और विषाणु अटक कर रह जाते हैं और फेफड़ों में नहीं जा पाते।
इस अंदरूनी दीवार की सतह पर बालों से भी छोटे और करोड़ों की संख्या में मौजूद रोये इन दूषित पदार्थों को गले के भीतर जाने से रोकते हैं और जो दूषित पदार्थ इन रोओं से बच कर अंदर पहुंच जाते है उन्हें हमारे आमाशय में मौजूद अम्ल (Acid) नष्ट कर देता है
जब हमें सर्दी होती है तो इसका मतलब है कि विषाणुओं (Virus) ने इस प्रतिरोधी कवच को भेदकर भीतरी कोशिकाओं पर आक्रमण कर दिया है। जब यह विषाणु संक्रमण (Viral Infection) होता है तो हमारी रोग प्रतिरोधक शक्ति (Immunity) भी सक्रिय (Active) हो जाती है।
ऐसी स्थिति में नाक की नसों (Veins) में अधिक मात्रा में रक्त बहने लगता है। जिसकी वजह से वह भाग लाल और गर्म प्रतीत होता है। बलगम वाली अंदरूनी परत में सूजन आ जाने से सांस लेने वाला मार्ग अवरुध्द हो जाता है और हमें नाक से सांस लेने में दिक्कत महसूस होती है।


जुकाम आमतौर पर दो तरीके से होता है :
  • हवा में मौजूद बैक्टीरिया या वायरस जब कभी सांस के जरिए शरीर में प्रवेश करते हैं, तो एलर्जी हो जाती है। नतीजा यह होता है कि पानी या बलगम नाक से बाहर आने लगते हैं।
  • हमारे गले में दो तरह के बैक्टीरिया मौजूद होते हैं - कुछ अच्छे और कुछ बुरे। कभी-कभी सर्दी-गर्मी बढ़ने, एकदम ठंडा-गर्म खाने, ठंडे से गर्म व गर्म से ठंडे माहौल में जाने, ठंडा पानी ज्यादा पीने या बारिश में भीगने से गले के बुरे बैक्टीरिया सक्रिय हो जाते हैं। ये बैक्टीरिया ही गले में इन्फेक्शन कर देते हैं और जुकाम (Jukam) की वजह बनते हैं। 


जुकाम कैसे फैलता है?
जुकाम छुआ-छूत की बीमारी है। उदाहरण के लिए यदि किसी व्यक्ति को जुकाम है और यदि वह छींकता है या अपने नाक को पकड़ने के बाद दूसरे को छूता है तो उस व्यक्ति को भी जुकाम हो जाता है जिसके सामने छींका गया है या जिसे पकड़ा है। इसके अतिरिक्त जुकाम के वायरस पेन, पुस्तक और कॉफी के कप में कई घंटे तक रहते हैं और इस प्रकार के वस्तुओं से भी यह फैल सकता है। खांसी और छींक वास्तव में इसके फैलने के प्रमुख कारण है।
क्या सर्दी में बाहर निकलने पर जुकाम लग सकता है?
सर्दी में बाहर निकलने पर जुकाम लगने की आशंका बहुत कम है। जुकाम सामान्यतः उस व्यक्ति के संपर्क में आने पर लगता है जिसे जुकाम हो। तापमान से इसका इतना असर नहीं पड़ता।


जुकाम के लक्षण


जुकाम के  उपचार (Treatment of Common Cold in Hindi)
  • साधारण जुकाम अपने आप पांच दिन में ठीक हो जाता है।
  • अगर बलगम सफेद हो तो यह एलर्जी की निशानी है। यह साधारण जुकाम होता है।
  • जुकाम को पांच दिन से ज्यादा हो जाएं या साथ में खांसी, बलगम, बदन दर्द व बुखार भी हो, तो समझना चाहिए कि आम जुकाम नहीं है।
  • अगर बलगम पीला हो हो व सांस की दिक्कत के साथ बुखार भी हो तो बैक्टीरियल इंफेक्शन होता है।
  • ऐसे में डॉक्टर के पास जाना चाहिए।
  • अगर कफ़ के साथ खून भी आए तो चिंताजनक बात है। यह टी.बी. का लक्षण हो सकता है। ऐसे में तुरन्त डॉक्टर से परामर्श लें।  

जुकाम दूर करने के घरेलू उपाय

1. लहसुन (Garlic)
 - लहसुन का जीवाणुरोधी और एंटीवायरल (antiviral) गुण सर्दी के लक्षणों से छुटकारा प्राप्त करने में बहुत सहायक होता है। लहसुन प्रतिरक्षा प्रणाली (immunity) के लिए अच्छा है और श्वसन मार्ग (respiratory process) को खोलने में मदद करता है।
कैसे करें उपयोग
- एक कप पानी में लहसुन की कली, दो चम्मच नींबू का रस, एक चम्मच शहद, और आधा चम्मच लाल मिर्च या लाल मिर्च पाउडर मिलाएं। इसे तब तक रोज खाएं जब तक सर्दी जुकाम से आराम ना हो।
- एक कप पानी में 4-5 कटे हुए लहसुन की कली उबाल लें और एक चम्मच शहद डालें। इसे दिन में दो से तीन बार सेवन करें।


2. शहद (Honey)
 - शहद में मौजूद एंजाइम (enzyme) में, उच्च मात्रा में बैक्टीरिया और वायरस को मारने के गुण होते हैं। शहद से गले का सूखापन दूर होता है और जुका्म जल्दी ठीक हो जाता है।
कैसे करें उपयोग
- सबसे सरल उपाय घर पर एक चम्मच नींबू का रस और दो चम्मच शहद मिलाएं। ठंडक और गले में खराश से राहत पाने के लिए हर दो घंटे में लें।
 यदि आप चाहें, तो एक चम्मच कच्चा शहद भी खा सकते हैं।



3. मसाला चाय (Masala chai)
 - किचन में रखे मसालों से बनी चाय जुकाम में बहुत जल्दी राहत देती है।
कैसे करें उपयोग 
 - एक चौथाई कप सूखा भुने हुए धनिया बीज पीसकर इसमें आधा चम्मच जीरा और सौंफ के बीज और एक चौथाई चम्मच मेथी के बीज मिलाएं। अब एक कप पानी उबाल लें और इसमें आधा चम्मच तैयार मसाला और आधा चम्मच मिश्री डालें। तीन से चार मिनट उबालें। इसके बाद दूध डालें और गरम गरम पीएं।



4. अदरक (ginger) 
 - अदरक अपने एंटीवायरल, एस्पेक्टरेन्ट (expectorant) गुणों के कारण सर्दी से राहत देता है।
कैसे करें उपयोग
- कच्चा अदरक खाने या एक दिन में अदरक की चाय कई बार पीने से लाभ होता है। अदरक की चाय के प्रभाव को बढ़ाने के लिए, चाय में नींबू का रस और शहद मिलाएं।
- अदरक, लौंग और नमक का एक पेस्ट तैयार करें। आधा चम्मच खा सकते हैं।
- नाक बह रही हो तो बराबर मात्र में सूखा अदरक पाउडर (Dry ginger powder) मक्खन या घी और गुड़ (jaggary) मिलाकर छोटी छोटी गोली बनाएं। सुबह रोजाना खाली पेट एक गोली खाएं।



5. लाल प्याज का सीरप (Syrup of red onion)  
 - घर के बने लाल प्याज सीरप से भी सर्दी से पीड़ित लोगों को राहत मिलती है।
कैसे करें उपयोग
- 2-3 लाल प्याज को बारीक गोल टुकड़ों में काट लें। एक बर्तन में प्याज का एक टुकड़ा रखें और कच्चा शहद मिलाएं। जब तक बर्तन भर न जाए तब तक प्रक्रिया को दोहराएं। कटोरे को ढक कर रखें और 12 से 15 घंटे के लिए छोड़ दें। प्याज सीरप की तरह मोटी परत में जम जाएगा।



6. चिकन का सूप (Chicken soup)
 - चिकन सूप कई में कई आवश्यक पोषक तत्व विटामिन हैं जो आम सर्दी के लक्षणों के उपचार में मदद करते हैं। चिकन सूप के उच्च एंटीऑक्सीडेंट गुण जुकाम को ठीक करने की प्रक्रिया में तेजी लाते हैं। सर्वोत्तम परिणामों के लिए, जैविक सब्जियों और चिकन का उपयोग कर, घर का बना चिकन सूप तैयार करें।

किसी भी कार्य को करने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। शरीर को भी ऊर्जा की आवश्यकता होती है और रीर इसकी पूर्ति, शरीर में उपलब्ध ग्लूकोज़ से करता है।
रक्त से ग्लूकोज़ इन्सुलिन नामक हार्मोन के द्वारा कोशिकाओं में पहुंचकर ऊर्जा प्रदान करता है। शरीर में इन्सुलिन का उत्पादन अग्न्याशय (pancreas) के द्वारा होता है।
भोजन शरीर में जाकर ग्लूकोज़ में परिवर्तित हो जाता है और ग्लूकोज़ रक्त में मिल जाता है। मधुमेह रोगी शरीर में उपलब्ध ग्लूकोज़ का पूरा उपयोग नही कर पाता है।
मधुमेह, चयापचय विकार (Metabolic Disorder) है। रक्त में ग्लूकोज़ की बढ़ी हुई मात्रा का अगर सही समय पर उपचार नही किया जाये तो यह शरीर के महत्वपूर्ण अंगो के लिए काफी नुकसानदायक होती है।

मधुमेह के प्रकार (Types of Diabetes in Hindi)
मधुमेह को दो श्रेणियों में रखा गया है, शरीर का इन्सुलिन न बना पाना टाईप । मधुमेह (Type I Diabetes) और शरीर में उपस्थित इन्सुलिन का सही तरीके से काम नहीं करना टाईप ॥ मधुमेह (Type II Diabetes), जिसके कारण ग्लूकोज़ कोशिकाओं में नहीं जाता है और रक्त में उसकी मात्रा बढ़ जाती है।
टाईप 1 मधुमेह (Type 1 Diabetes): यह एक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर (Autoimmune Disorder) है, इसमें शरीर की श्वेत कोशिकाएं अग्नाशय की इन्सुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को नष्ट कर देती हैं।
टाईप 2 मधुमेह (Type 2 Diabetes): टाईप 2 मधुमेह में शरीर में उत्पादित इन्सुलिन का सही उपयोग नहीं हो पता है। शरीर में इन्सुलिन की अतिरिक्त मात्रा के कारण अग्नाशय इन्सुलिन नही बनाता है।


मधुमेह के लक्षण



मधुमेह होने के कारण (Causes of Diabetes in Hindi)
  • मोटापा (Diabetes due to Obesity): मोटापा टाईप 2 मधुमेह होने का सबसे बड़ा कारण है। 
  • आनुवांशिक (Hereditary): इसे खानदानी रोग भी कहते है। अगर परिवार में किसी को टाईप 2 मधुमेह है या था तो सावधानी बरतने की ज़रूरत है।
  • गर्भावस्था में रक्त में ग्लूकोज़ की अधिक मात्रा (High sugar levels during pregnancy)
  • रक्त वाहिका रोग (Blood vessel disease)
  • उच्च रक्त चाप और उच्च कोलेस्ट्रोल लेवल (High blood pressure, high cholesterol)
  • प्री डायबिटिक (Pre-diabetes or impaired fasting glucose)

सामान्य उपचार


मधुमेह या डायबिटीज से बचाव का सबसे बढ़िया उपाय है इसकी जानकारी रखना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना। डायबिटीज से बचने के कुछ खान उपाय निम्न हैं: 
मधुमेह से बचाव (Treatment and Remedies for Diabetes in Hindi)
  • प्रतिदिन एक घंटा व्यायाम जरूर करें।
  • अपने घर में प्रतिदिन मधुमेह का टेस्ट करें। रक्त में शुगर की मात्रा का ध्यान रखें।
  • इन्सुलिन इंजेक्शन (Insulin Injetion) को तैयार करना और स्वयं लगाना आना चाहिए।
  • एक इन्सुलिन पम्प (Insulin Pump) साथ रखना।
  • कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrate) की गिनती को ध्यान में रखना।
  • रक्तचाप (Blood Pressure) कम होने पर मत्वपूर्ण जानकारी का ध्यान रखना

योग आसन (Yog Aaasan for Diabetes)
  • प्राणायाम
  • सेतुबंधासन
  • बालासन
  • वज्रासन
  • सर्वांगासन


घरेलू उपचार

  • दिन में एक बार 2 चम्मच करेले के रास का सेवन करें।
  • दिन में दो बार 1 चम्मच मेथी के पाउडर का सेवन पानी के साथ अवश्य करें।  
  • दिन में एक बार 2 चम्मच कड़वी लौकी के रस को एक चम्मच आंवला के रास के साथ मिलकर कर सेवन करें।


मधुमेह संबंधी समस्त आहार के लिए निम्नलिखित खाद्य पदार्थो से बचा जाना चाहिए:
  • जड़ एवं कंद
  • मिठाइयाँ, पुडिंग और चॉकलेट
  • तला हुआ भोजन
  • सूखे मेवे
  • चीनी
  • केला, चीकू, सीताफल आदि जैसे फल

सामान्यतः प्रतिदिन हमारे लगभग 50 से 100 बाल हर दिन टूटते-झड़ते हैं। यदि इससे ज्यादा बाल झड़ते (Hair Fall) हैं, तो यह चिंता का विषय है। बाल झड़ने के पीछे तनाव, इन्फेक्शन, हार्मोन्स का असंतुलन, पोषक पदार्थों की कमी, दवाओं के साइड इफेक्ट्स, लापरवाही बरतना या बालों की सही देखभाल न करना, घटिया साबुन और शैंपू का प्रयोग आदि कई कारण हो सकते हैं। 


कब-कब झड़ सकते हैं बाल (Reasons of Hair Fall in Hindi)
चिकित्सा विज्ञान के आधार पर बालों के झड़ने की कई वजहें होती हैं। जिनमें से कुछ खास कारण निम्न हैं: 
  • लंबी बीमारी, बड़े ऑपरेशन या किसी गभीर संक्रमण के कारण बालों का झड़ना सामान्य माना जाता है।
  • शारीरिक, मानसिक तनाव या डिप्रेशन की बीमारी के दो या तीन महीने के बाद बालों का झड़ना एक सामान्य प्रक्रिया है।
  • हार्मोन स्तर में आकस्मिक बदलाव के बाद भी यह हो सकता है, विशेषकर स्त्रियों में बच्चें के जन्म के बाद यह हो सकता है।
  • अत्यधिक द्वाईंयों के सेवन से या किसी एलर्जी के कारण भी कई बार बाल झड़ते हैं। 
  • बालों का झड़ना कई बीमारियों का लक्षण भी माना जाता है विशेषकर थाइरॉयड में यह महत्वपूर्ण निशानी माना जाता है। 
  • सेक्स हार्मोन में असंतुलन के कारण भी बाल झड़ते हैं। 
  • आहार में सतुंलन के कारण भी कई बार बाल झड़ते हैं विशेषकर अगर खाने में आप प्रोटीन, लौह तत्व या जस्ता आदि की कमी हो तो। यह कमी खान-पान में परहेज करने वालों और जिन महिलाओं को मासिक धर्म में बहुत ज्यादा रक्त स्राव होता है, में आम है।
  • सिर की त्वचा (खोपड़ी) में जब विशेष प्रकार की फफूंद से संक्रमण हो जाता है तो बीचों बीच में बाल झड़ने लगते हैं। बच्चों में आमतौर पर बीचों बीच के बाल झड़ने का संक्रमण पाया जाता है।
  • पुरुषों में अक्सर मांग से बालों का झड़ते हैं या फिर सिर के ऊपर से। पुरुषों में इस प्रकार बालों का झड़ना आम है और यह किसी भी समय यहां तक कि किशोरावस्था में भी आरंभ हो सकता है।


बालों का झड़ना के लक्षण



बाल झड़ने के प्रमुख कारण (Main Reason for Hair fall in Hindi)
बालों के झड़ने के कई कारण होते हैं जैसे मां-बाप से लगी बीमारी, डैंड्रफ, तनाव आदि। डॉक्टरों के अनुसार अधिक मात्रा में बाल झड़ने के मुख्य कारण निम्न माने जाते हैं: ​
  • पुरुष हार्मोन
  • वंशानुगत गंजापन:​ अगर पेरेंट्स या ग्रैंड पेरेट्स में से किसी को बालों के झड़ने या गंजेपन की समस्या है, तो बच्चों में भी ऐसा होने की आशंका ज्यादा होगी।
  • बढ़ती हुई आयु में भी बालों का झड़ना आम बात होती है। 
  • इंफेक्शन और डैंड्रफ फंगल इंफेक्शन से बाल झड़ सकते हैं। 
  • हालांकि थोड़ी-बहुत डैंड्रफ होना सामान्य है, खासकर मौसम बदलने पर, गर्मियों और बरसात की शुरूआत में, लेकिन ज्यादा होने पर यह बालों की जड़ों को कमजोर कर देती है। यह ड्राई और मॉइश्चर, दोनों रूप में हो सकती है। इससे बचाव के लिए साफ-सफाई का पूरा ख्याल रखें।
  • प्रदूषण और तनाव, बालों को गंवाने की अहम वजह है।
  • मानसून सीज़न में अकसर बाल झड़ने की समस्या आ जाती है। 
  • असंतुलित भोजन करने से शरीर को आवश्यक पोषण नहीं मिलता जो कई बार बाल झड़ने का कारण बनता है। 
  • कोई शारीरिक बीमारी जैसे थाइरॉयड के होने पर भी बाल झड़ने की समस्या देखने को मिलती है। 
  • अनियमित जीवनशैली और सौंदर्य प्रसाधनों का अनुचित इस्तेमाल करना भी बाल झडने की समस्या को न्यौता देते हैं।




रोकथामः
तनाव कम कर, उचित आहार लेकर, बाल संवारने की उचित तकनीक अपनाकर और यदि संभव हो तो बालों को झड़ने से रोकनेवाली दवाइयों का उपयोग कर बालों के झड़ने की समस्या को रोका जा सकता है। फफूंद संक्रमण की वजह से बालों को झड़ने की समस्या को बालों की सफाई पर ध्यान देकर, दूसरों के ब्रश, कंघी, टोपी आदि का उपयोग न कर बचा जा सकता है। दवाइयों की सहायता से वंशानुगत गंजेपन के कुछ मामलों को रोका जा सकता है।


बाल का झड़ना रोकने के लिए घरेलू नुस्ख़े (Home Remedies for Hair fall)

मेंहदी और आंवला (Rosemary and Amla)
मेंहदी और आंवला की बराबर मात्रा लेकर शाम को पानी में भींगने के लिए छोड़ दें।  रात भर भींगने के बाद सुबह इससे बालों को धोएं। इसे लगातार आजमाने बाल झड़ने रुक जाते हैं और बाल काले, मुलायम और लंबे भी होते हैं।


शंखपुष्पी (Shankpushpi)
शंखपुष्पी से बने तेल रोजाना नियमित रूप से बालों में लगाने से सफेद बाल काले हो जाते हैं। इसके तेल से मालिश करने से बालों की जड़ों को पोषण मिलता है और बाल झड़ने बंद हो जाते हैं।


शहद और अंडा (Honey and Egg)
शहद से बालों की जड़ों को उचित पोषण मिलता है। अगर शहद के साथ अंडे की जर्दी मिला दे तो इसका असर दोगुना हो जाता है। बालों की जड़ यानि स्कैल्प को इससे जरुरी प्रोटीन केराटिन मिलता है और बालों का झड़ना-गिरना बंद हो जाता है। 


भृंगराज (Bhringraj)
भृंगराज बालों के लिए वंडर मेडिसीन के रुप में जाना जाता है। इसके औषधीय गुणों से बालों को काफी फायदा पहुंचता है। रोजाना भृंगराज के तेल से बालों की मालिश करने से बाल न सिर्फ काले और घने होते हैं बल्कि बालों का टूटना भी रुक जाता है।  इसे लगाने से बालों में रुसी को भी कम होती है।


शिकाकाई (Shikakai)
शिकाकाई और आंवले को अच्छी तरह से कूट लें। दोनों को रात भर पानी में भीगने के लिए छोड़ दें। सुबह इस पानी को मसलकर छान लें और इससे बालों की मालिश करें। शिकाकाई और आंवले से बाल कभी सफेद नहीं होते व जिनके बाल सफेद हों तो वे भी काले हो जाते हैं। बालों का झड़ना-गिरना भी बंद हो जाता है।


नारियल तेल, ऑलिव ऑयल और नींबू का रस (Coconut oil, Olive Oil and Lemon Juice)
नारियल तेल और ऑलिव ऑयल की बराबर मात्रा लेकर इसमें नींबू की कुछ बूंदे मिला कर बालों की मालिश करें। मालिश के बाद फिर गर्म तौलिए से सिर को 3 मिनट के लिए ढक लें। यह करने से बालों का झड़ना बंद होता है और बाल काला भी होता है।



मेथी (Methi)
मेथी के बीजों में बालों को पोषण देने वाले सभी जरुरी तत्व मौजूद रहते हैं,जो बालों की जड़ को मजबूती प्रदान करता है। मेथी दानों को पीसकर चूर्ण बना लें। चूर्ण में पानी मिलाकर पेस्ट तैयार कर लें और इस पेस्ट को बालों में लगाएं। इसे लगाने से बालों का झड़ना-गिरना कम होगा और बाल काले, घने और लंबे होंगे। डैंड्रफ की परेशानी भी खत्म होगी। 


अमरबेल (Amarbel)
अमरबेल बालों के लिए टॉनिक की तरह काम करता है। अमरबेल को पानी में उबाल कर रख लें। जब पानी आधा हो जाए और अमरबेल पानी में पूरी तरह मिल जाए तो तो इसे उतार लें।  सुबह इससे बालों को धोएं। इससे बालों का झड़ना-गिरना रुक जाएगा। बाल लंबे, काले और घने भी होंगे। 


त्रिफला (Trifala)
त्रिफला चूर्ण में लौह भस्म मिलाकर सुबह-शाम खाने से बालों का झड़ना बंद हो जाता है और बालों में कुदरती रंग भी आती है।