निर्जलीकरण (डी-हाइड्रेशन) Dehydration


निर्जलीकरण (डी-हाइड्रेशन ) क्या है?
'शरीर से अत्यधिक मात्रा में तरल पदार्थ समाप्त हो जाना' निर्जलीकरण(डी-हाइड्रेशन) कहलाता है। हमारे शरीर को कार्य करने के लिए निर्धारित मात्रा में कम से कम 8 गिलास के बराबर (एक लीटर या सवा लीटर) तरल पदार्थ शरीर के लिए आवश्यक होता है जो व्यक्ति के कार्य करने की क्षमता और आयु पर निर्भर करता है। परंतु अधिक कार्यशील व्यक्ति को इससे दो या तीन गुना अधिक तरल पदार्थ की आवश्यकता होती है। हम जो तरल पदार्थ लेते हैं, वह उस तरल पदार्थ का स्थान ले लेती है जो हमारे शारीरिक कार्य को करने के लिए आवश्यक होता है। यदि हम, हमारे शरीर की आवश्यकता से कम तरल पदार्थ लेते हैं, तब निर्जलीकरण(डी-हाइड्रेशन) हो जाता है


निर्जलीकरण (डी-हाइड्रेशन ) क्यों होता है?
अंतड़ियों में यदि दहन हो रहा हो या उसे नुकसान पहुंच रहा हो अथवा कीटाणु या वायरस के जमा होने की वजह से अंतड़ियां अवशोषण करने की क्षमता से अधिक तरल पदार्थ उत्पन्न कर रहा हो तब आंत के मार्ग में अधिक तरल पदार्थ निकल जाता है जिससे निर्जलीकरण (डी-हाइड्रेशन) होता है। पेय के रूप में तरल पदार्थ कम मात्र में लेने का कारण भूख न लगना या मिचली होना हो सकता है।


डीहाइड्रेशन के कारण (Reasons & Causes of Dehydration)
  • शरीर में पानी की गंभीर समस्या कई बार जानलेवा भी हो सकती है
  • शरीर से पांच प्रतिशत द्रव खत्म होने पर कमज़ोरी, प्यास, उबकाई, चिड़चिड़ापन होता है।
  • शरीर से दस प्रतिशत द्रव खत्म होने पर सिर दर्द, चक्कर और अंगों में सनसनाहट पैदा हो सकती है। शरीर की त्वचा नीली पड़ने लगती है और शरीर कमज़ोर हो जाता है।
  • शरीर से पंद्रह प्रतिशत द्रव खत्म होने पर देखने और सुनने की शक्ति पर असर पड़ता है। जीभ में सूजन हो जाती है और खाना निगलने में दिक्कत होती है।
  • शरीर से पंद्रह प्रतिशत से ज्यादा द्रव खत्म होने पर इंसान की मृत्यु भी हो सकती है।
  • दस्त के कारण शरीर में हुए डीहाइड्रेशन से मनुष्य की मृत्यु के आसार ज्यादा होते हैं। गंभीर डीहाइड्रेशन (Pani ki Kami) की वजह से मनुष्य का ब्रेन डैमेज यानि उसके मस्तिष्क को हानि भी पहुंच सकती है। साथ ही हाइपोवोलेमिक शॉक का खतरा भी रहता है जिसमें शरीर के कई अंगों को हानि पहुंच सकती है।
  • यदि आपको चक्कर आ रहे हैं, या आप किसी भी कार्य को करने में खुद को असमर्थ पा रहे हैं तो ऐसे समय में डॉक्टर को दिखाना बेहद आवश्यक होता है। दो दिन से ज्यादा कब्ज या बुखार रहने पर तुरंत डॉक्टर से सम्पर्क करें।


डीहाइड्रेशन के लक्षण



डीहाइड्रेशन के उपाय (Treatment for Dehydration)
  • जितना हो सके ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं।
  • नवजात बच्चों में डीहाइड्रेशन के उपचार (pani ki kami ka ilaj) के लिए बच्चे को मां का दूध व पानी पिलाते रहें। पानी में ओआरएस का घोल मिलाकर पिलाएं।
  • ज्यादा भागदौड़ वाला काम ना करें और जितना हो सके आराम करें।
  • धूप में घर से बाहर ना निकलें और ठंडी जगह पर बैठे रहें।
  • दूध, कॉफी, फ्रूट जूस जैसे पदार्थों का सेवन करने से बचें।
  • इलेक्ट्रोलाइट्स से युक्त स्पोर्ट्स ड्रिंक्स का सेवन अवश्य करें।



डिहाइड्रेशन के लिए घरेलू नुस्ख़े (Home Remedies for Dehydration)

पानी पीने की मात्रा बढ़ाएं (Increase Water Intake)
डिहाइड्रेशन से निपटने का सबसे पहला कदम है कि पानी की मात्रा बढाएं। पूरे दिन में तकरीबन दस गिलास पानी पीना बहुत जरूरी है। यदि आपको प्यास न भी लग रही हो तब भी पानी जरूर पिएं। सादा पानी पीना अच्छा न लग रहा हो तो पानी में नींबू या इलेक्ट्रॉल आदि डालकर भी पानी पिया जा सकता है।

दही (Yogurt or Curd)
उल्टी, दस्त आदि के कारण हुए डिहाइड्रेशन के लिए दही एक अच्छा उपचार है। यह इलेक्ट्रोलाइट्स (Electrolytes) का भी अच्छा स्त्रोत होती है, इसलिए पेट के लिए फायदेमंद होती है और आसानी से पच भी जाती है। उपचार के लिए दही को सादा या दही में काला नमक और भुना जीरा डालकर भी खाया जा सकता है।

रसीले फल और सब्जियां (Watery Fruit and Vagetable)
यदि डिहाइड्रेशन की शुरूआत है तो रसीले फल और सब्जियों के सेवन से भी आराम संभव है। इन फल और सब्जियों में तरबूज, खरबूज, अंगूर, संतरा, स्ट्रॉबेरी, खीरा, ककड़ी, पपीता मूली, पालक, तोरी और टमाटर आदि हैं।

केला (Banana)
शरीर में डिहाइड्रेशन की शिकायत पोटैशियम जैसे खनिज की कमी के कारण होती है। केले में पोटैशियम भरपूर होता है, ऐसे में यह शरीर की डिहाइड्रेशन की समस्या से निपटने का आसान उपाय है। उपचार के लिए दिन में दो केले खाए जा सकते हैं या केले की स्मूथी बनाकर भी पी जा सकती है।

नारियल पानी (Coconut Water)
नारियल पानी का एक गिलास डिहाइड्रेशन से निपटने में काफी कारगर है। नारियल पानी में उच्च इलेक्ट्रोलाइट्स होते हैं जो कि नारियल पानी को हाइड्रेटिंग पेय बनाते हैं। इसमें चीनी की अपेक्षा कैलोरी भी बहुत कम होती है।

छाछ (Butter Milk)
यदि आप दिनभर धूप में काम करते हैं या आपको किन्हीं कारणों से अधिक पसीना आता है तो भी आपको डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है। इस तरह की समस्या से निपटने के लिए छाछ एक प्रभावी नुस्खा है। उपचार के लिए दिन में एक से दो गिलास छाछ पिएं।

सूप (Soup)
डिहाइड्रेशन से निपटने में सब्जियों के सूप भी प्रभावी असर दिखाते हैं। इसके लिए सूप में अजवायन, मूली और तोरी जैसी सब्जियां डालकर सूप तैयार करें। दिन भर में कम से कम एक बार सूप जरूर पिएं।

नींबू पानी (Lemon water)
नींबू पानी न सिर्फ शरीर को हाइडे्रट रखता है बल्कि शरीर के टॉक्सिन भी बाहर निकालता है। नींबू पानी पीने से ताजगी का एहसास होता है। नींबू पानी बनाने के लिए चीनी की जगह शहद का इस्तेमाल करें और एक चुटकी काली मिर्च भी डालें।

जौ का पानी (Barley Water)
जौ का पानी भी शरीर को हाइड्रेट रखने का अच्छा उपाय है। जौ के पानी से डिहाइड्रेशन के दौरान शरीर में हुई पोषक तत्वों की कमी की भरपाई होती है। यी आसानी से पच जाता है और शरीर को ठंडा रखता है। उपचार के लिए 4 कप पानी में एक कप जौ भिगा दें। उसके बाद इस पानी को लगभग 45 मिनट ढककर उबालें। जब अच्छी तरह उबल जाए तो इस पानी को छानकर गुनगुना रहने तक ठंडा करें और इसमें शहद मिलाकर पिएं। स्वाद बढ़ाने के लिए नींबू का रस भी मिलाया जा सकता है।

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